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Maharashtra Government Appoint Committee To Study Sc Order On Maratha Reservation – मराठा आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा करेगी महाराष्ट्र सरकार की समिति, दो सप्ताह में मांगी रिपोर्ट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sun, 09 May 2021 03:09 PM IST

सार

कोर्ट ने मराठा आरक्षण को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि मराठा समुदाय कोई पिछड़ा नहीं है, इसे सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा मानना गलत है।

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मराठा आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक समिति गठित करने का एलान किया है। शनिवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। समिति सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा और कोटा मुद्दे को हल करने के बारे में अपनी रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर राज्य सरकार को सौंपेंगी।  उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में  समिति गठित की गई है। समिति में न्यायाधीशों के अलावा पांच से 6 सदस्य भी रहेंगे। 

गौरतलब है कि बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण की मांग को रद्द कर दिया था।  कोर्ट ने मराठा आरक्षण को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि मराठा समुदाय कोई पिछड़ा नहीं है, इसे सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा मानना गलत है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने कहा है कि पहले से जो नियुक्तियां हुई हैं, उनमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा, लेकिन नई नियुक्तियों को अब आरक्षण नहीं मिलेगा।

विस्तार

मराठा आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक समिति गठित करने का एलान किया है। शनिवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। समिति सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा और कोटा मुद्दे को हल करने के बारे में अपनी रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर राज्य सरकार को सौंपेंगी।  उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में  समिति गठित की गई है। समिति में न्यायाधीशों के अलावा पांच से 6 सदस्य भी रहेंगे। 

गौरतलब है कि बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण की मांग को रद्द कर दिया था।  कोर्ट ने मराठा आरक्षण को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि मराठा समुदाय कोई पिछड़ा नहीं है, इसे सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा मानना गलत है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने कहा है कि पहले से जो नियुक्तियां हुई हैं, उनमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा, लेकिन नई नियुक्तियों को अब आरक्षण नहीं मिलेगा।

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