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Kanpur Coronavirus Cases Covid 19 Pandemic, Isolation Coach Of The Railway – लापरवाही: जिंदगी की गाड़ी छूट रही, रेलवे ने ‘क्वारंटीन’ कर रखे हैं 400 बेड वाले आइसोलेशन कोच

सार

मरम्मत कराकर टंकियों का पानी बदला जा रहा है, लेकिन मरीजों को लाभ नहीं दिया जा रहा है। रेलवे का कहना है कि जब शासन से इनकी डिमांड की जाएगी तभी इनका इस्तेमाल प्रशासन के सहयोग से किया जा सकेगा।

ट्रेन का आइसोलेशन कोच
– फोटो : अमर उजाला

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मरीजों को जहां एक ओर अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहे हैं वहीं, रेलवे ने 400 बेड वाले 25 आइसोलेशन कोचों को क्वारंटीन कर रखा है। पिछले साल बनाए गए इन कोचों का इस्तेमाल अभी तक नहीं हो सका है। हालांकि पिछले एक माह से हर हफ्ते इन आइसोलेशन कोचों की सफाई और सैनिटाइजेशन किया जा रहा है। मरम्मत कराकर टंकियों का पानी बदला जा रहा है, लेकिन मरीजों को लाभ नहीं दिया जा रहा है। रेलवे का कहना है कि जब शासन से इनकी डिमांड की जाएगी तभी इनका इस्तेमाल प्रशासन के सहयोग से किया जा सकेगा।

हर कोच पर खर्च हुए थे 50 हजार से ज्यादा
पिछले साल आइसोलेशन कोचों को बनाने में रेलवे ने खूब पैसे खर्च किए थे। हर कोच में करीब 50 हजार रुपये से अधिक का खर्च आया था। इसके बावजूद इसमें अब तक एक भी मरीज भर्ती नहीं किया गया। तबसे ये सारे कोच धूल फांक रहे थे। 

कोच में बाथरूम, टॉयलेट और मेडिकल केबिन
सीओडी पुल के नीचे जीटी रोड के पास रेलवे के न्यू कोचिंग कॉम्पलेक्स में ये 25 कोच खड़े हैं, इसमें 400 अस्थायी बेड हैं। इनमें ऑक्सीजन लगाने की सुविधा भी है। पैरामेडिकल स्टाफ के लिए हर कोच में एक केबिन है। टॉयलेट और बाथरूम की सुविधा के साथ एक कोच में 16 लोगों को एडमिट कर इलाज कराया जा सकता है।

विस्तार

मरीजों को जहां एक ओर अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहे हैं वहीं, रेलवे ने 400 बेड वाले 25 आइसोलेशन कोचों को क्वारंटीन कर रखा है। पिछले साल बनाए गए इन कोचों का इस्तेमाल अभी तक नहीं हो सका है। हालांकि पिछले एक माह से हर हफ्ते इन आइसोलेशन कोचों की सफाई और सैनिटाइजेशन किया जा रहा है। मरम्मत कराकर टंकियों का पानी बदला जा रहा है, लेकिन मरीजों को लाभ नहीं दिया जा रहा है। रेलवे का कहना है कि जब शासन से इनकी डिमांड की जाएगी तभी इनका इस्तेमाल प्रशासन के सहयोग से किया जा सकेगा।

हर कोच पर खर्च हुए थे 50 हजार से ज्यादा

पिछले साल आइसोलेशन कोचों को बनाने में रेलवे ने खूब पैसे खर्च किए थे। हर कोच में करीब 50 हजार रुपये से अधिक का खर्च आया था। इसके बावजूद इसमें अब तक एक भी मरीज भर्ती नहीं किया गया। तबसे ये सारे कोच धूल फांक रहे थे। 

कोच में बाथरूम, टॉयलेट और मेडिकल केबिन

सीओडी पुल के नीचे जीटी रोड के पास रेलवे के न्यू कोचिंग कॉम्पलेक्स में ये 25 कोच खड़े हैं, इसमें 400 अस्थायी बेड हैं। इनमें ऑक्सीजन लगाने की सुविधा भी है। पैरामेडिकल स्टाफ के लिए हर कोच में एक केबिन है। टॉयलेट और बाथरूम की सुविधा के साथ एक कोच में 16 लोगों को एडमिट कर इलाज कराया जा सकता है।

पिछले साल से कोच बनकर तैयार हैं। कोरोना की दूसरी लहर में मरीज बढ़ने पर मुख्यालय के निर्देश पर दोबारा से आइसोलेशन कोचों की सफाई कराकर हर सप्ताह सैनिटाइजेशन और कोचों में पानी बदला जाता है।– सुरेश कुमार, डिपो प्रभारी, न्यू कोचिंग कॉम्पलेक्स

रेलवे के आइसोलेशन कोच तैयार हैं, जरूरत होगी तो शासन की मांग पर रेलवे उन्हें उपलब्ध करा देगा। कानपुर समेत यूपी के जिन जिलों में जरूरत होगी, वहां यह पहुंचाए जाएंगे।– हिमांशु शेखर उपाध्याय, डिप्टी सीटीएम, कानपुर सेंट्रल

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