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International Shooter Chandro Tomar Died From Corona In Meerut – दुखद: अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज चंद्रो तोमर का निधन, कुछ दिन पहले कोरोना पॉजिटिव आई थी रिपोर्ट

अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: कपिल kapil
Updated Fri, 30 Apr 2021 03:40 PM IST

सार

अंतरराष्ट्रीय शूटर दादी चंद्रो तोमर का कोरोना से निधन हो गया है। कुछ दिन पहले ही उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आ गई थी। मेरठ के आनंद अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।

शूटर दादी चंद्रो तोमर
– फोटो : अमर उजाला

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति बटोरी और राष्ट्रीय स्तर पर 50 से अधिक पदक जीतकर कामयाबी हासिल करने वाली बागपत के जौहड़ी गांव निवासी अंतरराष्ट्रीय शूटर दादी चंद्रो तोमर का निधन हो गया है। कुछ दिन पहले ही उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आ गई थी। उनका मेरठ के आनंद अस्पताल में इलाज चल रहा था। उन्हें सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही थी।

मूलरूप से शामली के गांव मखमूलपुर में शूटर दादी का जन्म एक जनवरी 1932 को हुआ। सोलह साल की उम्र में जौहड़ी के किसान भंवर सिंह से उनकी शादी हो गई। भरे-पूरे परिवार में निशानेबाजी सीखने की दिलचस्प कहानी है। 

बता दें कि साल 1998 में जौहड़ी में शूटिंग रेंज की शुरुआत डॉ. राजपाल सिंह ने की। लाडली पौत्री शेफाली तोमर को निशानेबाजी सिखाने के लिए वह रोज घर से शूटिंग रेंज तक जाती थी। शेफाली शूटिंग सीखती और चंद्रो तोमर देखती रहती थी। एक दिन चंद्रो तोमर ने एयर पिस्टल शेफाली से लेकर खुद निशाना लगाया। पहला निशाना दस पर लगा… दादी की निशानेबाजी देख रहे बच्चों ने तालियां बजाई। यहीं से शुरू हुआ चंद्रो तोमर की निशानेबाजी का सफर।

नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति बटोरी और राष्ट्रीय स्तर पर 50 से अधिक पदक जीतकर कामयाबी हासिल करने वाली बागपत के जौहड़ी गांव निवासी अंतरराष्ट्रीय शूटर दादी चंद्रो तोमर का निधन हो गया है। कुछ दिन पहले ही उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आ गई थी। उनका मेरठ के आनंद अस्पताल में इलाज चल रहा था। उन्हें सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही थी।

मूलरूप से शामली के गांव मखमूलपुर में शूटर दादी का जन्म एक जनवरी 1932 को हुआ। सोलह साल की उम्र में जौहड़ी के किसान भंवर सिंह से उनकी शादी हो गई। भरे-पूरे परिवार में निशानेबाजी सीखने की दिलचस्प कहानी है। 

बता दें कि साल 1998 में जौहड़ी में शूटिंग रेंज की शुरुआत डॉ. राजपाल सिंह ने की। लाडली पौत्री शेफाली तोमर को निशानेबाजी सिखाने के लिए वह रोज घर से शूटिंग रेंज तक जाती थी। शेफाली शूटिंग सीखती और चंद्रो तोमर देखती रहती थी। एक दिन चंद्रो तोमर ने एयर पिस्टल शेफाली से लेकर खुद निशाना लगाया। पहला निशाना दस पर लगा… दादी की निशानेबाजी देख रहे बच्चों ने तालियां बजाई। यहीं से शुरू हुआ चंद्रो तोमर की निशानेबाजी का सफर।

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