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Girija Devi The Queen Of Thumri Birth Anniversary: Won Padma Shri, Padma Vibhushan, And Padma Bhushan – जन्मदिन विशेष: समाज के खिलाफ जाकर सीखा संगीत, बनी ठुमरी की रानी, पढ़िए गिरिजा देवी के संघर्ष की कहानी

सार

बनारस घराने की गिरिजा देवी को वर्ष 1972 में पद्श्री, 1989 में पद्म भूषण और 2016 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।

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‘ठुमरी की रानी’ के नाम से प्रख्यात शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी का जन्म आज ही के दिन वर्ष 1929 में वाराणसी (तत्कालीन बनारस) के निकट एक गांव में हुआ था। यह वह दौर था, जब समाज महिलाओं को गायन व मंच पर प्रदर्शन करना की अनुमति नहीं देता था। यही कारण था कि गिरिजा देवी की मां और दादी को कभी भी उनका संगीत पर समय गंवाना पसंद नहीं था। लेकिन उनके संगीत प्रेमी पिता रामदेव राय ने समाज की परवाह किए बगैर हमेशा गिरिजा देवी का साथ दिया।
अप्पा जी नाम से मशहूर, गिरिजा देवी ने पांच वर्ष की आयु में ही संगीत की शिक्षा लेना शुरू कर दिया। उन्होंने ठुमरी, टप्पा, ख्याल सहित बनारस के आस-पास के क्षेत्रीय गायन जैसे चैती, होरी, बारामासा आदि का अभ्यास करने के बाद उन्हें अलग रंग दिया।
15 साल की उम्र में अपने से बड़ी उम्र के बिजनेसमैन से हुई शादी
वर्ष 1944 में गिरिजा की शादी बिजनेसमैन मधुसूदन जैन से होई। मधुसूदन की पहले भी एक बार शादी हो चुकी थी और वे गिरिजा से उम्र में बड़े भी थे। किंतु उन्होंने गिरिजा के पिता से वादा किया था कि वे शादी के बाद भी गिरिजा को गायन से नहीं रोकेंगे। सिर्फ इस शर्त की वजह से पिता ने गिरिजा के लिए मधुसूदन को चुना। 

एक साक्षात्कार में गिरिजा देवी बताती हैं कि शादी के बाद उन्होंने (मधुसूदन जैन) ने मुझे किसी भी बड़े घर या निजी महफिल में गाने नहीं दिया। हालांकि अपने वादे के मुताबिक घर पर ही मुझे संगीत सीखने और गाने की अनुमति दे दी। मेरे पहले गुरु का निधन हो गया था इसलिए उन्होंने एक दुसरे गुरु श्रीचंद मिश्रा से मुझे संगीत की शिक्षा दिलवाई।

विस्तार

‘ठुमरी की रानी’ के नाम से प्रख्यात शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी का जन्म आज ही के दिन वर्ष 1929 में वाराणसी (तत्कालीन बनारस) के निकट एक गांव में हुआ था। यह वह दौर था, जब समाज महिलाओं को गायन व मंच पर प्रदर्शन करना की अनुमति नहीं देता था। यही कारण था कि गिरिजा देवी की मां और दादी को कभी भी उनका संगीत पर समय गंवाना पसंद नहीं था। लेकिन उनके संगीत प्रेमी पिता रामदेव राय ने समाज की परवाह किए बगैर हमेशा गिरिजा देवी का साथ दिया।

अप्पा जी नाम से मशहूर, गिरिजा देवी ने पांच वर्ष की आयु में ही संगीत की शिक्षा लेना शुरू कर दिया। उन्होंने ठुमरी, टप्पा, ख्याल सहित बनारस के आस-पास के क्षेत्रीय गायन जैसे चैती, होरी, बारामासा आदि का अभ्यास करने के बाद उन्हें अलग रंग दिया।

15 साल की उम्र में अपने से बड़ी उम्र के बिजनेसमैन से हुई शादी

वर्ष 1944 में गिरिजा की शादी बिजनेसमैन मधुसूदन जैन से होई। मधुसूदन की पहले भी एक बार शादी हो चुकी थी और वे गिरिजा से उम्र में बड़े भी थे। किंतु उन्होंने गिरिजा के पिता से वादा किया था कि वे शादी के बाद भी गिरिजा को गायन से नहीं रोकेंगे। सिर्फ इस शर्त की वजह से पिता ने गिरिजा के लिए मधुसूदन को चुना। 

एक साक्षात्कार में गिरिजा देवी बताती हैं कि शादी के बाद उन्होंने (मधुसूदन जैन) ने मुझे किसी भी बड़े घर या निजी महफिल में गाने नहीं दिया। हालांकि अपने वादे के मुताबिक घर पर ही मुझे संगीत सीखने और गाने की अनुमति दे दी। मेरे पहले गुरु का निधन हो गया था इसलिए उन्होंने एक दुसरे गुरु श्रीचंद मिश्रा से मुझे संगीत की शिक्षा दिलवाई।

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