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Epidemic: More Than 40 Dead Bodies Found In Ganga, Tradition Or Something Else, Know What Is The Whole Matter – महामारी: गंगा में मिलीं 40 से ज्यादा लाशें, परंपरा या कुछ और, जानिए क्या है पूरा मामला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बक्सर
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Tue, 11 May 2021 08:23 PM IST

सार

बिहार के बक्सर जिले में गंगा नदी में बड़ी संख्या में लाशें तैरती मिली हैं। लोगों का कहना है कि ये कोरोना संक्रमितों के शव हैं। 
 

लाशों को गंगा किनारे दफनाने की तैयारी
– फोटो : bbc

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बिहार के बक्सर जिले में गंगा नदी में एक साथ 40 से ज्यादा लाशें देख लोग हैरान रह गए। सूचना पाकर जब मीडियाकर्मी मौके पर पहुंचे तो उन्होंने इन्हें देखकर प्रशासन को सूचना दी। वहां जो नजारा था वह विचलित करने वाला था। 

चौसा के प्रखंड विकास पदाधिकारी अशोक कुमार के अनुसार गंगा नदी में 30 से 40 लाशें मिली हैं। उनका दावा है कि ये शव उत्तर प्रदेश से बहकर आए हैं। चौखा श्मशान घाट पर मौजूद लोगों का कहना है कि ये लाशें यहां की नहीं हैं। बक्सर के कलेक्टर अमन समीर ने कहा है कि हम लोग यूपी के गाजीपुर और बलिया के प्रशासन के साथ समन्वय के साथ उनके इलाकों की लाशों का दाह संस्कार वहीं कराने के प्रयास कर रहे हैं। बक्सर में बहकर आने वाले शवों का भी पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

यूपी-बिहार का सीमावर्ती है बक्सर जिला
बिहार को बक्सर जिला यूपी व बिहार का सीमावर्ती जिला है। यह गंगा नदी के किनारे बसा है। इसके उत्तर में बलिया और पश्चिम में गाजीपुर जिला है। 

मैंने 100 लाशें देखीं: पत्रकार सत्यप्रकाश
पत्रकार सत्यप्रकाश के अनुसार नौ मई को सुबह पहली बार उन्हें पता चला तो मौके पर गए। वहां उन्होंने 100 लाशें देखीं। वहीं घाट पर मौजूद रहने वाले पंडित दीन दयाल पांडे ने बताया कि अमूमन इस घाट पर दो से तीन लाशें ही रोज आती थीं, लेकिन इधर बीते 15 दिन से यहां तकरीबन 20 लाशें आती हैं। ये जो शव गंगा जी में तैर रहे हैं, ये संक्रमित लोगों के शव हैं। हम लोगों को गंगा में शव बहाने से मना करते हैं, लेकिन वे मानते नहीं हैं।  घाट पर रहने वाली अंजोरिया देवी बताती हैं कि लोगों को मना करते है, लेकिन लोग ये कहकर लड़ते हैं कि तुम्हारे घरवालों ने हमें लकड़ी दी है जो हम लकड़ी लगाकर शव जलाएं। 

अंत्येष्टि का पैसा नहीं है लोगों के पास
बक्सर की बात करें तो यहां कोविड संक्रमित मरीजों की अंत्येष्टि में 15-20 हजार का खर्च आता है। स्थानीय निवासी चंद्रमोहन कहते हैं, ‘प्राइवेट अस्पताल में लूट मची है।  आदमी के पास इतना पैसा नहीं बचा कि वो श्मशान घाट पर ले जाकर विधि पूर्वक अंत्येष्टि कराए।  एंबुलेंस से शव उतारने के लिए तो दो हजार रुपये मांगे जा रहे हैं। ऐसे में गंगा मैया ही आसरा बची हैं। लोग मैया को ही पार्थिव देह अर्पित कर रहे हैं।  

पौराणिक महत्व के कारण बहाते हैं शव
बक्सर के चरित्रवन घाट का पौराणिक महत्व है। अभी वहां कोरोना के चलते लाशों को जलाने की जगह नहीं मिल रही है। इसलिए लोग शवों को आठ किलोमीटर दूर चौसा श्मशान घाट ला रहे हैं। इस घाट पर लकड़ी की कोई व्यवस्था नहीं है। नावें भी बंद हैं, इसलिए लोग लाशों को गंगा मैया में ऐसे ही विसर्जित कर रहे हैं। नाव चालू होने पर बीच नदी में शवों को घड़ा बांधकर छोड़ा जाता है। यह परंपरा है। बहरहाल इन लाशों को बक्सर जिला प्रशासन चौसा घाट के समीप जेसीबी मशीन से गड्डा खुदवाकर दफना रहा है। 

विस्तार

बिहार के बक्सर जिले में गंगा नदी में एक साथ 40 से ज्यादा लाशें देख लोग हैरान रह गए। सूचना पाकर जब मीडियाकर्मी मौके पर पहुंचे तो उन्होंने इन्हें देखकर प्रशासन को सूचना दी। वहां जो नजारा था वह विचलित करने वाला था। 

चौसा के प्रखंड विकास पदाधिकारी अशोक कुमार के अनुसार गंगा नदी में 30 से 40 लाशें मिली हैं। उनका दावा है कि ये शव उत्तर प्रदेश से बहकर आए हैं। चौखा श्मशान घाट पर मौजूद लोगों का कहना है कि ये लाशें यहां की नहीं हैं। बक्सर के कलेक्टर अमन समीर ने कहा है कि हम लोग यूपी के गाजीपुर और बलिया के प्रशासन के साथ समन्वय के साथ उनके इलाकों की लाशों का दाह संस्कार वहीं कराने के प्रयास कर रहे हैं। बक्सर में बहकर आने वाले शवों का भी पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

यूपी-बिहार का सीमावर्ती है बक्सर जिला

बिहार को बक्सर जिला यूपी व बिहार का सीमावर्ती जिला है। यह गंगा नदी के किनारे बसा है। इसके उत्तर में बलिया और पश्चिम में गाजीपुर जिला है। 

मैंने 100 लाशें देखीं: पत्रकार सत्यप्रकाश

पत्रकार सत्यप्रकाश के अनुसार नौ मई को सुबह पहली बार उन्हें पता चला तो मौके पर गए। वहां उन्होंने 100 लाशें देखीं। वहीं घाट पर मौजूद रहने वाले पंडित दीन दयाल पांडे ने बताया कि अमूमन इस घाट पर दो से तीन लाशें ही रोज आती थीं, लेकिन इधर बीते 15 दिन से यहां तकरीबन 20 लाशें आती हैं। ये जो शव गंगा जी में तैर रहे हैं, ये संक्रमित लोगों के शव हैं। हम लोगों को गंगा में शव बहाने से मना करते हैं, लेकिन वे मानते नहीं हैं।  घाट पर रहने वाली अंजोरिया देवी बताती हैं कि लोगों को मना करते है, लेकिन लोग ये कहकर लड़ते हैं कि तुम्हारे घरवालों ने हमें लकड़ी दी है जो हम लकड़ी लगाकर शव जलाएं। 

अंत्येष्टि का पैसा नहीं है लोगों के पास

बक्सर की बात करें तो यहां कोविड संक्रमित मरीजों की अंत्येष्टि में 15-20 हजार का खर्च आता है। स्थानीय निवासी चंद्रमोहन कहते हैं, ‘प्राइवेट अस्पताल में लूट मची है।  आदमी के पास इतना पैसा नहीं बचा कि वो श्मशान घाट पर ले जाकर विधि पूर्वक अंत्येष्टि कराए।  एंबुलेंस से शव उतारने के लिए तो दो हजार रुपये मांगे जा रहे हैं। ऐसे में गंगा मैया ही आसरा बची हैं। लोग मैया को ही पार्थिव देह अर्पित कर रहे हैं।  

पौराणिक महत्व के कारण बहाते हैं शव

बक्सर के चरित्रवन घाट का पौराणिक महत्व है। अभी वहां कोरोना के चलते लाशों को जलाने की जगह नहीं मिल रही है। इसलिए लोग शवों को आठ किलोमीटर दूर चौसा श्मशान घाट ला रहे हैं। इस घाट पर लकड़ी की कोई व्यवस्था नहीं है। नावें भी बंद हैं, इसलिए लोग लाशों को गंगा मैया में ऐसे ही विसर्जित कर रहे हैं। नाव चालू होने पर बीच नदी में शवों को घड़ा बांधकर छोड़ा जाता है। यह परंपरा है। बहरहाल इन लाशों को बक्सर जिला प्रशासन चौसा घाट के समीप जेसीबी मशीन से गड्डा खुदवाकर दफना रहा है। 

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