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DNA ANALYSIS: If these 3 things are implemented, then the problem of doctors and beds in corona era will be solved | DNA ANALYSIS: इन 3 बातों पर अमल करें तो देशभर में दूर हो जाएगी डॉक्टर्स और बेड्स की समस्या

नई दिल्ली: इस समय हमारा देश वैक्सीन और ऑक्सीजन के अलावा अस्पतालों में बेड्स की कमी के संकट से भी गुजर रहा है. इसलिए अब हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं. ये जानकारियां बहुत महत्वपूर्ण हैं.

हर दिन 3 लाख से ज्यादा नए केस

अभी भारत में हर दिन कोरोना वायरस से तीन लाख से ज्यादा मरीज संक्रमित हो रहे हैं. लेकिन एक अनुमान के मुताबिक, हर एक मरीज पर कम से कम पांच मरीज ऐसे हैं, जो संक्रमित तो हैं लेकिन उन्होंने अपना टेस्ट नहीं कराया. इस हिसाब से देखें तो अनुमान है कि भारत में हर दिन 15 लाख लोग संक्रमण का शिकार हो रहे हैं. अब अगर ये मान लें कि इनमें से 5 प्रतिशत मरीजों को अस्पतालों में आईसीयू (ICU Beds) की जरूरत है तो ये संख्या हो जाएगी 75 हजार.

एक ही दिन में भर जाएंगे सारे ICU Bed

एक मरीज औसतन 10 दिन से 14 दिन तक ICU Bed पर रहता है, और अस्पतालों में बेड्स का संकट यही से शुरू होता है. वो ऐसे कि इस समय देश में 75 हजार से 95 हजार आईसीयू बेड ही मौजूद हैं, जो मौजूदा स्थिति के हिसाब से एक दिन में ही भर जाएंगे. यानी अगले 10 से 14 दिन तक जो मरीज आएंगे, उन्हें अस्पतालों में बेड नहीं मिलेंगे और यही इस समय देश में हो रहा है.

बेड के साथ नर्सिंग स्टाफ का होगा भी जरूरी

अगर इस समस्या को हल करना है तो सरकार को 5 लाख नए आईसीयू बेड देश के अस्पतालों में बढ़ाने होंगे. लेकिन यहां समझने वाली एक बात ये भी है कि अस्पतालों में मरीजों का इलाज बेड्स नहीं करते, बल्कि डॉक्टर करते हैं और उनकी अच्छी देखभाल के लिए पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ की जरूरत होती है, जिनकी संख्या हमारे देश में काफी कम है.

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11 से 15 मई के बीच पीक पर होगा कोरोना!

कोरोना महामारी से पहले भारत में 1400 से ज्यादा मरीजों पर सिर्फ एक डॉक्टर उपलब्ध था. लेकिन आज स्थिति और खराब हो गई है. इस समय सरकारी अस्पतालों में 76 प्रतिशत स्वास्थ्य कर्मियों की कमी है, और संकट आने वाले दिनों में और गहरा सकता है. ऐसी आशंका जताई गई है कि 11 मई से 15 मई के बीच भारत में कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या 33 से 45 लाख के बीच होगी. तब हमें बड़ी संख्या में डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ की जरूरत पड़ेगी.

इस तरह पूरी हो सकती है डॉक्टर्स की कमी

यानी इस समय हमें अस्पतालों में बेड्स के साथ डॉक्टरों की ज्यादा जरूरत है, क्योंकि आप अस्पतालों में बेड से अपने मरीजों का इलाज नहीं करवा सकते. तो ये पूरी स्थिति है. हालांकि कुछ कदम उठा कर इस दबाव को कुछ हल्का किया जा सकता है. हम आपको ऐसी तीन बातें बताएंगे, जिससे इस संकट का भी हल निकल सकता है. देशभर में डॉक्टर्स की कमी को पूरा किया जा सकता है.

मेडिकल स्टूडेंट्स से लें मदद

इस समय देश में 25 हजार डॉक्टर ऐसे हैं, जो मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं, और उन्हें अपने फाइनल एग्जाम का इंतजार है. अगर सरकार इन सभी डॉक्टरों का कोरोना काल में बिना परीक्षा के प्रैक्टिस करने का मौका देती है तो इससे अस्पतालों पर दबाव कम हो सकता है. इसके साथ ही डॉक्टरों की कमी भी कुछ हद तक पूरी हो सकती है.

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ट्रेनिंग के बदले NEET में ग्रेड मार्क्स

भारत में 1 लाख 30 हजार डॉक्टर ऐसे हैं, जो MBBS की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं और अब पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए NEETT की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. यहां समझने वाली बात ये है कि हमारे देश में पोस्ट ग्रेजुएशन की 35 हजार सीटें ही हैं. यानी इनमें से लगभग 1 लाख छात्रों को सीट ही नहीं मिलेगी. ऐसे में सरकार इन छात्रों से कोविड काल में एक साल की ट्रेनिंग करवा सकती है और इस ट्रेनिंग के बदले उन्हें NEET में अलग से ग्रेड मार्क्स दे सकती है, जिससे इतने सारे डॉक्टर देश को इस संकट काल में मिल जाएंगी.

इस तरह देश को मिलेंगे 20 हजार डॉक्टर्स

तीसरी और आखिरी तरीका ये है कि अभी देश में 20 हजार छात्र ऐसे हैं, जिन्होंने दूसरे देशों में रह कर मेडिकल की पढ़ाई की है और भारत में डॉक्टरी करने के लिए उन्हें अलग से एक परीक्षा देनी होती है. अगर सरकार इस परीक्षा की शर्त को हटा ले या इसमें भी ग्रेड मार्क्स जोड़ दे तो ये 20 हजार डॉक्टर भी देश को मिल सकते हैं.

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