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2-dg Medicine Will Be A Game-changer: Virus Will Suffocate In The Infected Patients Body, Will Also Reduce The Dependency On Oxygen – गेमचेंजर 2-डीजी दवा: संक्रमित मरीज में वायरस का दम घोंट देगी, ऑक्सीजन पर निर्भरता भी घटाएगी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Sat, 08 May 2021 05:32 PM IST

सार

डीआरडीओ और डॉक्टर रेड्डी लैब द्वारा तैयार की गई 2-डीजी दवा कोरोना के इलाज में गेमचेंजर साबित हो सकती है। परीक्षण में इसके अच्छे नतीजे आए हैं। 
 

डीसीजीआई ने कोरोना के इलाज के लिए दी मंजूरी
– फोटो : ANI

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डीआरडीओ लैब इंस्टीट्यूट ने डॉ. रेड्डीज लैब के साथ मिलकर कोरोना वायरस से निपटने के लिए नई दवा ‘2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज ‘ (2-डीजी) बनाई है। परीक्षण में इसके अच्छे नतीजे सामने आए हैं। शनिवार को इस दवा के आपात इस्तेमाल की मंजूरी दी गई। आइये जानते हैं, यह शरीर में कैसे काम करेगी और कोरोना मरीजों की कैसे रक्षा कर सकेगी।

डीआरडीओ ने हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के साथ मिलकर इस दवा को तैयार किया है। क्लिनिकल परीक्षण में सामने आया है कि 2-डीजी दवा अस्पताल में भर्ती मरीजों के तेजी से ठीक होने में मदद करती है। यह कोरोना के इलाज में गेमचेंजर साबित हो सकती है। 

पानी में घोलकर पीना होगी
2-डीजी दवा पाउडर के रूप में पैकेट में उपलब्ध होगी। इसे पानी में घोलकर पीना होता है। डीआरडीओ के अनुसार 2-डीजी दवा वायरस से संक्रमित मरीज की कोशिका में जमा हो जाती है और उसको और बढ़ने से रोकती है। संक्रमित कोशिका के साथ मिलकर यह एक तरह से सुरक्षा दीवार बना देती है। इससे वायरस उस कोशिका के साथ ही अन्य हिस्से में भी फैल नहीं पाएगा। 

ऐसे करेगी वायरस का खात्मा
यह दवा लेने के बाद मरीज की अतिरिक्त ऑक्सीजन पर निर्भरता कम होगी। विशेषज्ञों के अनुसार यदि वायरस को शरीर में ग्लूकोज न मिले तो उसकी वृद्धि रुक जाएगी। डीआरडीओ के डॉक्टर एके मिश्रा ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में बताया कि साल 2020 में ही कोरोना की इस दवा को बनाने का काम शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि साल 2020 में जब कोरोना का प्रकोप जारी था, उसी दौरान डीआरडीओ के एक वैज्ञानिक ने हैदराबाद में इस दवा की टेस्टिंग की थी।

उन्होंने सामान्य भाषा में दवा के बारे में समझाते हुए दावा किया कि वायरस के विकास के लिए ग्लूकोज का होना जरूरी है। यदि उसे ग्लूकोज नहीं मिलेगा तो उसका विकास नहीं हो सकेगा। कोशिका से चिपकी इस दवा को वायरस ग्लूकोज समझ कर खाने की कोशिश करेगा, लेकिन ये ग्लूकोज नहीं है, इसलिए इसे खाने से वायरस का खात्मा हो जाएगा और मरीज ठीक होने लगेगा।   

आसानी से होगा उत्पादन
यह दवा मध्यम से गंभीर लक्षण वाले कोरोना मरीजों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। डीआरडीओ ने कहा कि एक सामान्य अणु और ग्लूकोज के एनालॉग से इसे तैयार किया है। इसकी वजह से इसका आसानी से उत्पादन हो सकेगा। औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने इस दवा के आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। इससे कोरोना के मरीजों को राहत मिलेगी।
 

विस्तार

डीआरडीओ लैब इंस्टीट्यूट ने डॉ. रेड्डीज लैब के साथ मिलकर कोरोना वायरस से निपटने के लिए नई दवा ‘2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज ‘ (2-डीजी) बनाई है। परीक्षण में इसके अच्छे नतीजे सामने आए हैं। शनिवार को इस दवा के आपात इस्तेमाल की मंजूरी दी गई। आइये जानते हैं, यह शरीर में कैसे काम करेगी और कोरोना मरीजों की कैसे रक्षा कर सकेगी।

डीआरडीओ ने हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के साथ मिलकर इस दवा को तैयार किया है। क्लिनिकल परीक्षण में सामने आया है कि 2-डीजी दवा अस्पताल में भर्ती मरीजों के तेजी से ठीक होने में मदद करती है। यह कोरोना के इलाज में गेमचेंजर साबित हो सकती है। 

पानी में घोलकर पीना होगी

2-डीजी दवा पाउडर के रूप में पैकेट में उपलब्ध होगी। इसे पानी में घोलकर पीना होता है। डीआरडीओ के अनुसार 2-डीजी दवा वायरस से संक्रमित मरीज की कोशिका में जमा हो जाती है और उसको और बढ़ने से रोकती है। संक्रमित कोशिका के साथ मिलकर यह एक तरह से सुरक्षा दीवार बना देती है। इससे वायरस उस कोशिका के साथ ही अन्य हिस्से में भी फैल नहीं पाएगा। 

ऐसे करेगी वायरस का खात्मा

यह दवा लेने के बाद मरीज की अतिरिक्त ऑक्सीजन पर निर्भरता कम होगी। विशेषज्ञों के अनुसार यदि वायरस को शरीर में ग्लूकोज न मिले तो उसकी वृद्धि रुक जाएगी। डीआरडीओ के डॉक्टर एके मिश्रा ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में बताया कि साल 2020 में ही कोरोना की इस दवा को बनाने का काम शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि साल 2020 में जब कोरोना का प्रकोप जारी था, उसी दौरान डीआरडीओ के एक वैज्ञानिक ने हैदराबाद में इस दवा की टेस्टिंग की थी।

उन्होंने सामान्य भाषा में दवा के बारे में समझाते हुए दावा किया कि वायरस के विकास के लिए ग्लूकोज का होना जरूरी है। यदि उसे ग्लूकोज नहीं मिलेगा तो उसका विकास नहीं हो सकेगा। कोशिका से चिपकी इस दवा को वायरस ग्लूकोज समझ कर खाने की कोशिश करेगा, लेकिन ये ग्लूकोज नहीं है, इसलिए इसे खाने से वायरस का खात्मा हो जाएगा और मरीज ठीक होने लगेगा।   

आसानी से होगा उत्पादन

यह दवा मध्यम से गंभीर लक्षण वाले कोरोना मरीजों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। डीआरडीओ ने कहा कि एक सामान्य अणु और ग्लूकोज के एनालॉग से इसे तैयार किया है। इसकी वजह से इसका आसानी से उत्पादन हो सकेगा। औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने इस दवा के आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। इससे कोरोना के मरीजों को राहत मिलेगी।

 

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